Description
About the Book:
The book is a collection of hindi poetry based on different shades of life.
About the Author:
तारकेश्वर शाह का नाम सुनने और बोलने में लोगों को कठिनाई होती थी। जब वे कॉलेज पहुँचे और नए लोगों से मिलना-जुलना शुरू किया तो उनके बहुत से दोस्त बन गए। अक्सर जब कोई उनसे पहली बार नाम पूछता तो “तारकेश्वर शाह” उन्हें लंबा और कठिन लगता। इसी कारण उनके दोस्तों ने उनका नाम छोटा कर “तारक” रख दिया, ताकि पुकारने में आसानी हो।
तारकेश्वर शाह ने भी इस नाम को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया और तभी से वे अपने लेखन और रचनाओं में “तारक” नाम ही इस्तेमाल करने लगे। धीरे-धीरे लोग भी उन्हें तारक कहकर बुलाने लगे।
उनका मानना है कि यदि वे “तारकेश्वर शाह” लिखते हैं और साथ ही उसे छोटा कर “तारक” भी लिखते हैं, तो इसमें उन्हें विशेष आनंद मिलता है। इससे एक ओर उनका मूल नाम बना रहता है और दूसरी ओर दोस्तों की दी हुई पहचान भी पूरी हो जाती है। इस प्रकार उनका पूरा नाम हुआ— तारकेश्वर शाह तारक।




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