Description
About The Book
‘बचपन की गलियाँ और यादों के पन्ने’ एक भावनात्मक और आत्मीय पुस्तक है, जिसमें लेखक मुकेश कुमार ने अपने बचपन की उन अनमोल स्मृतियों को शब्दों में पिरोया है, जो समय बीत जाने के बाद भी मन में जीवित रहती हैं। गाँव का सरल जीवन, दोस्तों के साथ खेलना, मिट्टी से खिलौने बनाना, बारिश के दिनों में मस्ती करना, बहन के साथ विद्यालय जाना और नाना-नानी के स्नेहपूर्ण साथ जैसी अनेक यादें इस पुस्तक का आधार हैं।
पुस्तक में लेखक ने अपने पिता की दुकान से जुड़ी बचपन की यादों, परिवार के प्यार, छोटी-छोटी शरारतों और उस समय की मासूम खुशियों को भी बड़ी सहजता से प्रस्तुत किया है। इन घटनाओं में कहीं हँसी है, कहीं अपनापन और कहीं बीते समय की भावुक कर देने वाली कसक। लेखक की स्मृतियाँ पाठक को अपने बचपन की गलियों में वापस ले जाती हैं, जहाँ खुशियाँ महँगे साधनों में नहीं, बल्कि दोस्तों, परिवार और छोटी-छोटी चीजों में मिलती थीं।
यह पुस्तक केवल लेखक की व्यक्तिगत स्मृतियों का संग्रह नहीं, बल्कि उस पूरे बचपन की कहानी है जिसे आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम पीछे छोड़ आए हैं। यह कृति पाठकों को अपने बचपन, परिवार और उन रिश्तों को याद करने के लिए प्रेरित करती है, जिनकी यादें जीवनभर हमारे साथ रहती हैं।
About The Author:
मुकेश कुमार पुत्र श्री फूलाराम जी गांव खेजड़ियां
तहसील शिवगंज जिला सिरोही राजस्थान
शिक्षा: B.TECH IN MECHANICAL ENGINEERING
About the Author
मुकेश कुमार पुत्र श्री फूलाराम जी, ग्राम खेजड़ियां, तहसील शिवगंज, जिला सिरोही, राजस्थान के निवासी हैं। उन्होंने B.Tech in Mechanical Engineering की शिक्षा प्राप्त की है। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उन्हें अपने जीवन के अनुभवों, परिवार और बचपन की यादों को शब्दों में संजोने में विशेष रुचि रही है। उनके लेखन में गाँव के सरल जीवन, पारिवारिक रिश्तों, बचपन की मासूमियत और बीते समय की मधुर स्मृतियों की झलक दिखाई देती है। ‘बचपन की गलियाँ और यादों के पन्ने’ उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति का एक प्रयास है, जिसके माध्यम से वे पाठकों को अपने बचपन और पुरानी यादों से जोड़ना चाहते हैं।






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