Description
विकसित देशों में पर्यावरणीय समस्याएं बहुत विकराल रूप धारण कर लिए हैं। आर्थिक प्रतिस्पर्धा तथा भौतिक विकास पर्यावरण को प्रभावित करता जा रहा है.मानव की समस्त आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से ही होती है। आधारभूत संसाधन जैसे जल, भूमि तथा वायु की प्राकृतिक गुणवत्ता में उतरोत्तर अवक्रमण होता जा रहा है ,फलतः पर्यावरण का आर्थिक पक्ष घुटन के दौर से गुजर रहा है। यदि पारिस्थितिकी इसी तरह नष्ट होती गयी तो जैव जगत का आर्थिक तंत्र ध्वस्त हो सकता है। अन्ततः महाविनाश भी हो सकता है। ऐसी पारिस्थितिकीय मकड़जाल को समझना और समाधान ढूँढना वर्तमान समय की सामायिक आवश्यकता है। इसीलिए आर्थिक पर्यावरण की संकल्पना पुस्तक की रचना पाठ्य पुस्तक के रूप में की गयी है।
About The Author
डॉ. वीना उपाध्याय
असिस्टेंट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग
करामत हुसैन गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, निशातगंज, लखनऊ
डॉ. वीना उपाध्याय अर्थशास्त्र विषय की प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता हैं। वे वर्तमान में करामत हुसैन गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, निशातगंज, लखनऊ के अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
शिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनके लगभग 40 शोधपत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा उन्होंने 22 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं सम्मेलनों में अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए हैं।
डॉ. उपाध्याय की अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो उनके गहन अध्ययन, शोध-दृष्टि एवं विषयगत विशेषज्ञता का प्रमाण हैं। अध्यापन कार्य के साथ-साथ वे शोध निर्देशक (Research Supervisor) के रूप में भी सक्रिय हैं तथा अनेक शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
शैक्षिक उत्कृष्टता, अनुसंधान के प्रति समर्पण एवं ज्ञान-सृजन की सतत साधना ने उन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है।



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